Poem in Bhojpuri
साधु आउर भेड़िया
एगो साधु रेत पर एगो रेखा खींच के कहलन:
" तू इ रेखा के पार ना जा सकेल."
फिर एगो चक्र बनाके कहलन:
" तू इ चक्र पार कर सकेल लेकिन रेखा ना."
अचानक तूफान आइल आउर सब रेखा गायब हो गइल.
एगो भेड़िया घेरा में खड़ा रहे.
जाड़ा आउर बारिश ओकरा तबाह कर देले रहल.
लेकिन उ ऊहां से ना हटल.
उ ना जानत रहे कि रेखा अब ऊहां मौजूद बा,
जबकि कौनो रेखा ऊहां मौजूद ना रहे .
Translated into Bhojpuri by Sujata Gupta