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ताल की आहट
नाइट क्लब - न गर्म ना सर्द, भीड़ जैसे बड़े-से कद्दू में भरे बीज
अजनबी कदमों के चिपचिपे निशाँ, नीचे गिरी बियर में बनते बिगड़ते
धब्बेदार चेहरों पर लाल-सा खालीपन लिये,
बिजली के तारों में उलझते गिरते, बुल्गारियन्स मुंडी हिलाते
और ताली बजाते अभिवादन में, चुटकियाँ बजाते.
वे अपने काल्पनिक आनंद में डरे-डरे से झूमते, जब मैं अचानक
पट्टी बढाकर सुरों की सारी श्रृंखला बजाता हूँ,
एक क्षण में ठुमरी से ग़ज़ल बन जाता हूँ.
संगीतकार की कष्टमय ज़िंदगी एक दर्दभरा अहसास है
मरते हुए अमर स्वरों का, एक ही रचना को पुनः पुनः दोहराने का
और किसी असफल प्रयोग के बाद दीवार पर सर मारने का.
मैं स्पॉटलाइट पर भिनकते मच्छरों से दोस्ती करता हूँ, मैं मर जाऊँगा,
नीचे गिरकर, घृणा की सड़न में कोढ़ी बनकर, कफ़लिंक्स की गिटार पर रगड़ से
अंधा हो जाऊँगा. मेरी ज़िंदगी, टूट चुकी है तीन बार, मेरी चाहत के आलाप
बदल चुके हैं चार बार - यही चीज़ें हैं जो बनाती हैं ज़िंदगी को
जीने लायक.
मैंने अपने हाथों आज ही बनाया केक पेश किया, लेकिन मुझे अहसास हुआ
कि तुम्हें ऐसी बेतहाशा मदद करना कितना बुरा है.
मैं तुम पर कोई दर्द भरा गीत पोत दूँ, कोई नगमा तुमपर लीप दूँ,
एक बड़ा-सा शब्द फेंक मारूं, जो तुम मेरी बात न मानो. मुझसे तुम सिर्फ
लेना चाहती हो और नहीं भी, लेना चाहती हो और नहीं भी, लेना चाहती हो और नहीं भी,
यही ताल है जो नकारात्मकता से हाँ कहता है और सकारात्मकता से जाने कहाँ चला जाता है.
उल्हास द्वारा अनुवादित
घोघा
जब उसने झाडियों के पीछे देखा लसलसा
बड़ा घोघा. "इसे तो भुना जायेगा!"
बुलाता है, और साथ ही आग भी जलाता है.
उसको आग में पकाएगा. आग चटकती और छिटकती है.
उसे बस एकटक देखता है. ढूढता है एक नाम
घोघा के लिए. मिल गया. "डोका - वोका!"
चिल्लाता है. मैं उससे पूछता हूँ मतलब
उस शब्द का जिसको पहले कभी सुना नहीं.
"हा हा. अगर नहीं जानते फिर तो तुम मुर्ख हो
ना की मैं! हा हा, इतना भी नहीं जानते की क्या नाम है
उस महान कवि के दोस्त का. "
फिर वो झपटता है उस घोघे की तरफ, जो है
जंगली जानवर की तरह बड़ा. उसको जमींन पर पटकता है, जब तक
उसका दम नहीं निकलता. बेचारा घोघा. अभी कुछ ही समय
पहले तो उसे देखा था, कैसे वह
उस चोटी पर मखियों के बीच
गणेश गुप्ता द्वारा अनुवादित
बीटल्स
चलता हुआ गुफा में, ढूँढता हूँ उन चीजों को, जो वो छोड़ गए पीछे :
गिटार - सुडौल सा, बाएं हाथ का। मैं भी तो बाएं हाथ का हूँ, मानता
हूँ। मेरा गिटार भी तो उतना ही सुडौल है कि जैसे वो बनाया गया है
बाएं हाथ वालों के लिए। सृजन उस शिल्पी का, जिसको मिला मेहनताना
गिटार बनाने का। विस्मित सा सोचता हूँ कि गर पॉल को झांकना होता
वापस समय में कि जब उनके पास उनका अपना इंग्लिश शिल्पी होता,
जिसने बनाया था गिटार उनका। चल रहा हूँ मैं, साथ-साथ, गुफा के
संकरे गलियारे के साथ। मैं पहुँच रहा हूँ छोटी, सीलन भरी जगह पर।
भारतीय सितार रखी है एक कोने में, जिसे जार्ज ने रख छोड़ा था। यह
एक वाद्ययंत्र है जो संगीत में अलग-अलग अन्तराल देता है, अब सबसे
छोटी इकाई अर्ध स्वर नहीं बल्कि चतुर्थांश स्वर है, यहाँ वह ध्वनि है,
परम ध्वनि जिसे मानव कान अभी भी सुनने को हैं। मैं बढ़ रहा हूँ आगे,
अगले कमरे में। मैं देखता हूँ एक आधी जली हुई मारिजुआना सिगरेट।
ऐसा लगता है मुझे कि ये रिंगो की थी लेकिन कुछ है जो बताता है कि वो
जॉन था जिसने सिगरेट पी थी।
पीयूष कुमार द्वारा अनुवादित
तपस्वी और भेड़िया
एक तपस्वी ने रेत पर एक लकीर खीची और कहा:
“तुम इस रेखा को पार नहीं करोगे.”
फिर उसने एक गोला घेरा और बोला:
“तुम इस घेरे के अंदर ही रहना.
घेरे को तो पार कर सकते हो पर रेखा को कभी नहीं.”
फिर तुफान आया और लकीर गायब हो गई.
एक भेड़िया उस घेरे में खड़ा था.
जाड़े ने उसे ठिठुराया, बरसात ने गिलाया, पर वह डिगा नहीं.
वह नहीं जानता कि वह रेखा अब अस्तित्व भी रखती है,
जब कि वह रेत पर नहीं खीची दिखती.
प्रभास रंजन द्वारा हिन्दी में अनुवादित
हेलेना
नेपोलियन आया तुम्हारे द्वीप पर
और चकित रह गया देखकर,
उस समृद्ध प्रकृति को, जिसकी तुम अधिकारी हो
गह्वर के तल में, एक तिनका जो गुदगुदता रहा तुम्हें,
ऊब गई तुम उससे इतना, कि भूपृष्ठ पर तुम उभर आई
प्रकाश भोर की बाहों में गीरा
और तुमने स्वयं को समर्पण कर दिया उसके प्रति
और मैं चला पैदल, तुम्हारे संग, और पूछा स्वयं को
क्या तुम्हारे द्वीप पर, ईगुआना भी हैं,
क्या डारविन भी यहाँ फूल उगाता है, स्निग्ध वुडरफ़
क्या यहाँ के पवन चक्कियों और झींगो के बीच सौहार्द है,
और आदमी के राह, रेत पर बिछे हुए है
और फ़िर मैं मिला उनसे, और उनकी आँखों की गहराईयों में देखा
मैं बौने के सन्मुख खड़ा
जिसने दावा किया कि कद में वो मुझसे छोटा है, लेकिन अन्यथा नहीं
और अब, शतरंज खेल रहे हैं हम, तुम्हारे द्वीप पर, तुम्हारे गह्वर के समीप
वह द्वीप-तुम्हारी त्वचा, जिसपर हम अपनी मुर्ती स्थापित करते है और तुम,
स्वर्गीय उल्लास, मुस्कुरा रहे हो, हम दोनो की ओर
कैसे मैं नेपोलियन हो सकता हूँ, जब मैं न ही
जेनेरल कुतुज़ोव हूँ, और न हि पुलीस का मंत्री, फ़ाऊशे?
क्योंकि मैं नहीं सफ़ेद दाढ़ियो से लदा एक विद्वान,
और न हि एक साधारण नाविक, जिसको पसन्द कर सको तुम बन्दरगाहों में
मैं बस गरीबों का मदद करता हूँ
जो अपनी बाहें फैलाकर, तुम्हारे पैरों में मोतियाँ ढूंढ़ते हैं
सूर्य द्वारा अनुवादित
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