Klemen Pisk

poet, writer, translator and musician

Poem in Maithili

साधु आओर भेड़िया

एकटा साधु बालुमे एकटा डाँड़ि खींचलकाह आओर कहलकाह:
"अहाँ ई डाँड़ि केँ पार नहि कए सकैत छी।"
फेर ओ एकटा गोल घेर बनओलकाह:
"अहाँकेँ ई घेरक भीतर रहनाइ चाही।
अहाँ एकरा पार कए सकैत छी, मुदा डाँड़ि भ’ कए नहि।"
तखन एकटा अँधर आएल आओर डाँड़ि गुम भ’ गेल।
एकटा भेड़िया घेर मे ठाड़ि छल।
जाड़ आओर पानि ओकरा थकाए देलक, परंच ओ नहि घसकल।
ओ नहि जानए छल जे डाँड़ि अखनो मोजुद अछि,
जँ ई आब बालुमे नहि बनाएल अछि।

Translated into Maithili by Sangeeta Kumari